FIR Kaise Darj Kare? 2026 Me Puri Process, Documents Aur Aapke Adhikar
यदि किसी व्यक्ति के साथ चोरी, लूट, मारपीट, धोखाधड़ी, साइबर फ्रॉड या किसी अन्य गंभीर अपराध की घटना होती है तो आपको अपने क्षेत्र के थाने में जाकर वहा थानाध्यक्ष या वहा के अधिकारी से मिलकर उक्त घटना जो भी आपके साथ हुई है उसकी पूरी जानकारी सच-सच और सही सही देनी होती है जिसे हम पहला कानूनी कदम FIR (First Information Report) क़ानूनी भाषा में कहते है |
![]() |
| FIR Kaise Darj Kare |
आज भी लाखों लोग इस बात को लेकर परेशान रहते हैं की FIR (First Information Report) कैसे लिखवाई जाती है कौन से डाक्यूमेंट्स लगते हैं पुलिस फिर लेने से मन कर दे तो क्या करना चाहिए और ऑनलाइन फिर का प्रोसेस क्या है |
FIR (First Information Report) लिखाने की जरूरत तब पर जाती है जब मामला संगीन हो घरेलु मामले के लिए बिहार एवं अन्य जगह पंचायतो में सरपंच के पास पंचो को इकठ्ठा कर एवं दोनों पक्षों के लोगो को बुलाकर मामले की सुनवाई करने प्रावधान है यदि मामला का निष्पादन ग्राम कचहरी में हो जाए तो FIR (First Information Report) करने की आवश्यकता नहीं परती है |
वर्तमान में पंचायत राज के अधिकारियो के द्वारा ग्राम में ग्राम कचहरी पर जोर दिया जा रहा है ताकि ग्रामीण मामलो का हल ग्राम में ही हो जाए इससे गरीब व्यक्ति जो पुलिस या न्यायालय का चक्कर काटने में असमर्थ है उनकी भी सुनवाई हो | ग्राम कचहरी के मामले भी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दर्ज किये जाते है |
ऑनलाइन यदि बिहार के ग्राम कचहरी में करना है तो यहाँ क्लिक करें |
ऑफलाइन के लिए ग्राम के कचहरी सचिव से मिलकर उन्हें लिखित में आवेदन दे | आवेदन कैसे लिखना है क्या लिखना इसके लिए यहाँ क्लिक करें |
FIR (First Information Report) थाने में भी ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा कर दी गई है आप अपने क्षेत्र के अधिकारिक Website पर जाकर खुद से Online FIR Process की प्रक्रिया कर सकते है |
इस आर्टिकल में हम 2026 के नए प्रैक्टिकल प्रोसेस के हिसाब से हर सवाल का जवाब देंगे. अगर आप इस गाइड को पूरा पढ़ते हैं तो फिर से जुडी लगभग हर कन्फूसिओं दूर हो जाएगी |
FIR Kya Hoti Hai?
FIR ka full form First Information Report होता है.
यह पुलिस द्वारा तैयार की जाने वाली पहली ऑफिसियल रिपोर्ट होती है जो किसी Cognizable Offence की जानकारी मिलने पर रजिस्टर की जाती है |
Cognizable Offence का मतलब ऐसे अपराध जिनमे पुलिस बिना कोर्ट की परमिशन के इन्वेस्टीगेशन शुरू कर सकती है और ज़रूरत पड़ने पर अरेस्ट भी कर सकती है |
उदाहरण के लिए :- Murder, Rape, Kidnapping, Theft, Robbery, Dacoity, Acid Attack, Cyber Fraud (kai cases me), Serious Assault
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस इन्वेस्टीगेशन शुरू करती है
FIR Aur Complaint Me Kya Antar Hai?
बहुत लोग complaint और FIR को एक ही समझते हैं |
complaint और FIR दोनों अलग चीज़ें हैं :-
Complaint FIR
1. किसी भी मैटर की जानकारी 1. Cognizable Offence का रिपोर्ट
2. आपका हर कम्प्लेन FIR नहीं माना 2. FIR के बाद ही पुलिस जानकारी इकट्ठा करने
जाएगा में लग जाती है |
3. कम्प्लेन में पुलिस जानकारी इकठ्ठा के 3. पुलिस क़ानूनी के हिसाब से अपनी पूरी
लिए इन्क्वायरी कर सकती है प्रक्रिया करती है |
यह पढ़े :- थाना में आवेदन कैसे लिख कर दे ?
FIR Kab Darj Ki Jaati Hai?
जब किसी संज्ञेय अपराध की सूचना पुलिस को दी जाती है, तब एफआईआर दर्ज की जाती है।
जैसे—
- मोबाइल चोरी हो जाना
- बाइक या कार चोरी होना
- मारपीट होना
- जान से मारने की धमकी मिलना
- ऑनलाइन धोखाधड़ी होना
- महिलाओं के विरुद्ध अपराध
- साइबर अपराध
एफआईआर कौन दर्ज करा सकता है?
एफआईआर केवल पीड़ित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि निम्न लोग भी दर्ज करा सकते हैं—
- पीड़ित व्यक्ति
- पीड़ित का परिवार
- रिश्तेदार
- प्रत्यक्षदर्शी (गवाह)
- कोई भी व्यक्ति जिसे अपराध की जानकारी हो
एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवश्यक दस्तावेज
हर मामले में दस्तावेज अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्यतः निम्न दस्तावेज उपयोगी होते हैं।
पहचान पत्र
- आधार कार्ड
- वोटर आईडी
- पैन कार्ड
- पासपोर्ट
- ड्राइविंग लाइसेंस
पता प्रमाण
- आधार कार्ड
- राशन कार्ड
- बिजली बिल
घटना से संबंधित साक्ष्य
- फोटो
- वीडियो
- सीसीटीवी फुटेज
- कॉल रिकॉर्डिंग
- व्हाट्सएप चैट
- ईमेल
- बैंक स्टेटमेंट
- लेन-देन की रसीद
- मेडिकल रिपोर्ट
वाहन चोरी होने पर
- आरसी
- बीमा पत्र
- ड्राइविंग लाइसेंस
- वाहन नंबर
मोबाइल चोरी होने पर
- IMEI नंबर
- खरीद का बिल
ऑफलाइन एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया
चरण 1
अपने निकटतम पुलिस थाने जाएं।
चरण 2
ड्यूटी अधिकारी को पूरी घटना विस्तार से बताएं।
चरण 3
घटना की तिथि, समय, स्थान, गवाह और उपलब्ध साक्ष्य की जानकारी दें।
चरण 4
पुलिस आपकी एफआईआर तैयार करेगी।
चरण 5
एफआईआर को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
चरण 6
यदि सभी जानकारी सही हो, तभी हस्ताक्षर करें।
चरण 7
एफआईआर की एक प्रति निःशुल्क प्राप्त करें।
ये जानकारी आपके लिए :- यदि महिला विधवा है तो उन्हें मिल सरकार दे रही है 300000 रूपये पढ़े पूरी जानकारी!
एफआईआर में कौन-कौन सी जानकारी होती है?
- एफआईआर नंबर
- थाना का नाम
- घटना की तिथि
- घटना का समय
- शिकायतकर्ता का नाम
- घटना का स्थान
- अपराध का विवरण
- लागू धाराएँ (बीएनएस/अन्य कानून)
- जांच अधिकारी का नाम
जीरो एफआईआर (Zero FIR) क्या होती है?
यदि अपराध किसी दूसरे जिले या राज्य में हुआ है, तब भी आप किसी भी पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।
इसे जीरो एफआईआर कहा जाता है।
बाद में संबंधित पुलिस थाना उस एफआईआर को अपने क्षेत्राधिकार वाले थाने में भेज देता है।
यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना कर दे तो क्या करें?
यदि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो आप निम्न कदम उठा सकते हैं—
1. पुलिस अधीक्षक (SP) से शिकायत करें।
2. अपनी शिकायत स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजें।
3. न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करें।
4. राज्य पुलिस के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
5. साइबर अपराध होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर तुरंत शिकायत करें।
ये भी पढ़े :- तलाक लेने के लिए तलाकनामा कैसे बनवाते है पूरी जानकारी हिंदी में !
ऑनलाइन एफआईआर कैसे दर्ज करें? (2026)
आज अधिकांश राज्यों में ऑनलाइन शिकायत या ई-एफआईआर की सुविधा उपलब्ध है।
सामान्य प्रक्रिया—
1. राज्य पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
2. "Citizen Services" विकल्प चुनें।
3. "Online FIR" या "e-FIR" विकल्प चुनें।
4. मोबाइल नंबर से सत्यापन करें।
5. अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरें।
6. घटना का पूरा विवरण लिखें।
7. आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
8. आवेदन जमा करें।
9. प्राप्त संदर्भ संख्या (Reference Number) सुरक्षित रखें।
एफआईआर दर्ज होने के बाद क्या होता है?
- एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस—
- मामले की जांच शुरू करती है।
- साक्ष्य एकत्र करती है।
- गवाहों के बयान दर्ज करती है।
- आरोपी की तलाश करती है।
- आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी करती है।
- जांच पूरी होने पर न्यायालय में आरोप पत्र (Charge Sheet) प्रस्तुत करती है।
क्या एफआईआर रद्द हो सकती है?
हाँ, यदि जांच में अपराध सिद्ध नहीं होता, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते या शिकायत झूठी पाई जाती है, तो कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मामला बंद किया जा सकता है।
ये भी पढ़े :- जमीन का बँटवारा के लिए वंशावली अति आवश्यक कागजात है इसे कैसे बनवाते है पूरी जानकारी हिंदी में |
एफआईआर दर्ज कराते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- हमेशा सही जानकारी दें।
- झूठे साक्ष्य प्रस्तुत न करें।
- एफआईआर की प्रति सुरक्षित रखें।
- एफआईआर नंबर नोट करें।
- जांच अधिकारी का नाम और संपर्क विवरण सुरक्षित रखें।
- समय-समय पर मामले की स्थिति की जानकारी लेते रहें।
महिलाओं के लिए विशेष अधिकार
महिलाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में उनका बयान उनके निवास स्थान या सुविधाजनक स्थान पर भी दर्ज किया जा सकता है। ऐसे मामलों में महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति का भी प्रावधान है।
साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें?
यदि आपके साथ ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, क्रेडिट कार्ड या निवेश से जुड़ी धोखाधड़ी हुई है, तो तुरंत शिकायत दर्ज करें। समय पर शिकायत करने से धन वापस मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
एफआईआर दर्ज कराने के लाभ
- कानूनी रिकॉर्ड तैयार होता है।
- पुलिस जांच प्रारंभ करती है।
- न्यायालय में साक्ष्य के रूप में उपयोग होता है।
- बीमा दावा करने में सहायता मिलती है।
- पीड़ित के अधिकारों की रक्षा होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1. एफआईआर का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: प्रथम सूचना रिपोर्ट (First Information Report)।
प्रश्न 2. क्या एफआईआर दर्ज कराने के लिए कोई शुल्क देना पड़ता है?
उत्तर: नहीं, एफआईआर दर्ज कराना पूरी तरह निःशुल्क है।
प्रश्न 3. क्या पुलिस एफआईआर की प्रति देने से मना कर सकती है?
उत्तर: नहीं, शिकायतकर्ता को एफआईआर की प्रति निःशुल्क दी जाती है।
प्रश्न 4. क्या किसी दूसरे जिले में भी एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है?
उत्तर: हाँ, जीरो एफआईआर के माध्यम से।
प्रश्न 5. क्या ऑनलाइन एफआईआर सभी राज्यों में उपलब्ध है?
उत्तर: सभी राज्यों में व्यवस्था समान नहीं है। कई राज्यों में ऑनलाइन शिकायत तथा कुछ मामलों में ई-एफआईआर की सुविधा उपलब्ध है।
प्रश्न 6. क्या एफआईआर दर्ज कराने के लिए वकील आवश्यक है?
उत्तर: नहीं, कोई भी व्यक्ति स्वयं एफआईआर दर्ज करा सकता है।
निष्कर्ष
एफआईआर किसी भी गंभीर अपराध के बाद न्याय प्राप्त करने की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कानूनी कदम है। यदि आपको अपने अधिकारों की जानकारी है और आप सही समय पर सही प्रक्रिया अपनाते हैं, तो न्याय मिलने की संभावना अधिक मजबूत हो जाती है। इसलिए किसी भी गंभीर अपराध की स्थिति में बिना देर किए एफआईआर दर्ज कराएं और अपने सभी दस्तावेज एवं साक्ष्य सुरक्षित रखें।
भारत में देर हो सकती है न्याय मिलने में हो सकता है माहिनो या सालो तक कोर्ट के दरवाजे पर हाजिरी लगाना परे किन्तु जब भी आपको लगे आपके साथ बुरा होने वाला है या कुछ गलत हुआ है आप आवज उठाइये डरिये नहीं आपका डर एक और अपराध को जन्म देता है संगीन यदि अपराध है रेप और हत्या जैसे मामलो में आपको जो भी करना परे करे पर न्याय के लिए लरे जरुर आपके एक न्याय से लाखो लोगो का मनोबल बढ़ेगा न्यायालय के प्रति मन में अच्छी भावना बनेगी और न्याय मिलेगा |
आखिर में इतना ही कहना है सच्चाई जीत ही जाती है न्याय मिलता है | तो कोशिश जरुर करें जीवन के अंत तक न्याय के लिए प्रयास करते रहे | जय हिन्द

0 Comments
Thank You!!